Incredibly Bizarre Rituals From Around The World

21वीं सदी में भी दुनियाभर में कई जगह प्राचीन सभ्यता के नाम पर आज भी अजीबोगरीब रस्मो रिवाज कायम हैं. इनमें से कई तो दिल दहला देने वाले हैं. हम यहां ऐसे ही कुछ अजीबो-गरीब रस्मो-रिवाज लेकर आए हैं, जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

यहां खाते हैं मुर्दे की अस्थियां

निश्चित ही आपको जानकर आश्चर्य हो रहा होगा कि ये भी सच हो सकता है. ब्राजील और वेनेजुएला के कुछ आदिवासी समुदाय अपने ही मृत रिश्तेदारों की अस्थियां खाते हैं. शव को जलाने के बाद बची हड्डियों और राख का सेवन किया जाता है. इसके लिए वह केले के सूप का इस्तेमाल कर सकते हैं. मान्यता है, इससे लोग अपनों के प्रति जुड़ाव और प्यार महसूस करते हैं.

नरभक्षण और शवभक्षण

भारत के वाराणासी में अघोरी बाबा मृत व्यक्ति के शरीर के टुकड़े और मांस के लूथड़े खाने के लिए कुख्यात हैं. इनका मानना है, ऐसा करना से इनके मन से मौत का डर चला जाएगा. इसके अलावा इन्हें आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति हो जाएगी. मान्यता के मुताबिक, पवित्न व्यक्ति, बच्चे, गर्भवती, कुंवारी लड़कियों, कुष्ठ रोग और सांप के काटे जाने वाले का दाह संस्कार नहीं किया जाता. इन सभी को गंगा नदी में बहा दिया जाता है. अघोरी बाबा इन्हें निकाल अपनी रस्में पूरी करते हैं.

बॉडी मॉडिफिकेशन 

पपुआ न्यूगिनी कनिंनगारा डरावनी रस्म निभाते हैं. इसमें वह शरीर को खुरचकर डिजाइन बनाते हैं, जिससे यह निशान जीवन भर रह जाते हैं. वहीं, हॉज टम्बरान (आत्माओं का घर) नामक रस्म में किशारों को आत्माओं के घर अकेले दो माह तक छोड़ दिया जाता है. इसके बाद उन्हें मर्द बनाने की परंपरा निभाई जाती है. उनके शरीर पर बांस के लकड़ी से छोटे खूनी निशान बनाए जाते हैं. यह निशान समुदाय में मर्दानगी की निशानी है.

शिया मुस्लिम में हुसैन का शोक

दुनियाभर में शिया मुस्लिम पैगंबर साहब के पोते इमाम हुसैन की मौत में शोक व्यक्त करते हैं. हुसैन की मौत शिया मुस्लिम द्वारा सातवीं सदी में कर्बला युद्ध में हुई थी. सभी शिया हुसैन की याद में शोक करते हुए कहते हैं, हम उस युद्ध में क्यों नहीं थे, अगर होते तो हुसैन को बचा लेते. सभी शिया खुद को पाप का भागीदार मानते हैं। वे खुद पर अत्याचार करते हैं और लहूलुहान कर लेते हैं.

जानलेवा है बंजी जंपिंग

पैसिफिक द्वीपसमूह पर स्थित बनलेप गांव में कोल नामक यह परंपरा लैंड डायविंग या बंजी जंपिंग कहलाती है. ग्रामीण ड्रम बजाते हैं, नाचते-गाते हैं. परंपरा के अनुसार लकड़ी के ऊंचे टॉवर से पैरों में रस्सी में बांधकर छलांग लगाई जाती है. इस दौरान हड्डी टूटने का खतरा रहता है. मान्यता है, जितनी ऊंचाई से यह कूदेंगे, भगवान उतना ही आशीर्वाद देंगे.

जादू और वशीकरण

वोडून पश्चिमी अफ्रीका के हिस्से का धर्म है. समुदाय के लोग जंगलों में तीन दिन तक बिना खाए-पिए रहते हैं. यहां यह आत्माओं से खुद को जोड़ते हैं. मान्यता है, उनका शरीर बेहोश हो जाता है.

आकाश में दफन

तिब्बत के बौद्ध समुदाय के लोग झाटोर नाम की रस्म को हजारों वर्षो से निभा रहे हैं. इसे स्काय बरिल भी कहते हैं. यह मृत शरीर को खुले आसमान में गिद्धों को दूसरे पक्षियों के लिए रख देते हैं. मान्यता है, इससे इंसान का पुर्नजन्म होगा. यहां मृत व्यक्ति के लाशों को टुकड़ों में काट कर सबसे ऊंची जगह फैला दिया जाता है.

आग पर चलना

मलेशिया के पेनांग में नौ देवताओं का त्यौहार मनाने की परंपरा है. इसमें अंगारों पर चला जाता है. मान्यता है, इससे यह आग से निकल कर पवित्न हो जाएंगे और बुरी शक्तियों के बंधन से मुक्त हो जाएंगे. यह परंपरा भारत के भी कई हिस्सों में पाई जाती है.

मृत शरीर के साथ डांस

मेडागास्कर में व्यक्ति की मौत के बाद त्यौहार जैसा माहौल होता है. फामाडिहाना यानी टर्निग ऑफ द बोन्स रस्म में लोग दफन शवों को फिर से निकाल उनकी यात्ना निकालते हैं. इस दौरान लोग नाचते-गाते भी हैं. मस्जिद में कब्रों के नजदीक जोर से म्यूजिक बजाते हैं. इसी परंपरा को दो साल से सात साल के बीच में किया जाता है.

शरीर भेदना

थाईलैंड के फुकेट में हर साल वेजिटेरियन फेस्टिवल के दौरान यह अनोखी हिंसात्मक रस्म निभाई जाती है. इसमें लोग चाकू, भाला, बंदूक, सुई, तलवारें और हुक जैसी चीजों से शरीर को भेदते हैं. मान्यता है कि इस दौरान भगवान उनकी रक्षा कर रहे हैं.

मुखिया के मरने पर काट देते हैं अंगुलियां

इंडोनेशिया के पापुआ गिनी द्वीप में रहने वाली दानी प्रजाति के लोग अजीब परंपरा निभाते हैं. इसके तहत परिवार के मुखिया की मौत होने पर परिवार से जुड़ी सभी महिलाओं की अंगुलियां काट दी जाती है. लोगों का मानना है, इससे मरने वाले की आत्मा को शांति मिलती है.

अंतिम संस्कार में स्ट्रिप डांसर्स

ताइवान में अंतिम संस्कार के मौके पर स्ट्रिप डांसर्स को बुलाने की परंपरा है. माना जाता है, इससे भटकती आत्मा को शांति मिलती है. इसी तरह चीन में मृतक के सम्मान में ये स्ट्रिप डांसर्स बुलाई जाती हैं.

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