मंदिरों के देश भारत में ऐसे कई ऐतिहासिक मंदिर हैं जो आज भी अपनी भव्यता और महत्ता के लिए भक्तों और पर्यटकों के बीच प्रसिद्द हैं. उन्हीं में से एक है जंगमवाड़ी मठ. वाराणसी में स्थित ‘जंगमवाड़ी मठ’ यहाँ का सबसे पुराना मठ है. करीब 50000 फैले हुए इस मठ को ज्ञान सिंहासन और ज्ञान पीठ  के नाम से भी जाना जाता है. जंगम’ का अर्थ होता है शिव को जानने वाला एवं ‘वाड़ी’ का मतलब होता है रहने का स्थान.

शिवलिंग का दान

इस मठ में शिवलिंगों की स्थापना को लेकर एक विचित्र परंपरा चली आ रही है. दरअसल, इस स्थान पर मरे हुए लोगों अौर अकाल मृत्यु हो उनकी आत्मिक शांति के लिए शिवलिंग स्थापित करने की परंपरा है. इस वजह से यहां आत्मा की शान्ति के लिए पिंडदान नहीं बल्कि शिवलिंग का दान होता है. वैसे यह परंपरा सैंकड़ों सालों से चली आ रही है जिस वजह से यहां पर एक ही छत के नीचे दस लाख से भी ज्यादा शिवलिंगों की स्थापना हो चुकी है और जो शिवलिंग ख़राब अवस्था में होने लगते है उनको मठ में ही सुरक्षित स्थान पर रख दिया जाता है.

Shivling

ये मठ दक्षिण भारतीयों का है और जिस तरह से हिन्दू धर्म में लोग अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिये पिंडदान करते है, ठीक उसी तरह से वीरशैव संप्रदाय के लोग अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए शिवलिंग दान करते है. बता दें , 250 वर्षों से लगातार चली आ रही इस परंपरा में सबसे अधिक शिवलिंगों की स्थापना सावन मास में की जाती है.

वैसे इस मठ की ख़ास बात ये भी है कि यहां पर शिवलिंग दान के अलावा जब कोई महिला पांच महीने गर्भवती होती है तो उसके कमर में बच्चे की रक्षा के लिए छोटा सा शिवलिंग बांध दिया जाता है. सिर्फ इतना ही नही बल्कि बच्चे के जन्म के कुछ महीनों बाद वहीँ शिवलिंग उस बच्चे के गले में बांध दिया जाता है और माँ दूसरा शिवलिंग धारण कर लेती है, जो जिंदगीभर उसके साथ रहता है.

जंगमवाड़ी मठ

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