अपने बच्चों को सिखाएं शेयरिंग की आदत

Sharing Is Caring
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नौकरी के चलते कई लोग परिवार से दूर शहर चले जाते हैं. उनके बच्चे भी वहीं रहते हैं. ऐसे में संयुक्त परिवार बिखरकर अधिकतर परिवार एकाकी हो रहे हैं. बच्चे भी कम ही होते हैं. अगर बात उनके व्यक्तिगत विकास की करें, तो ऐसे परिवारों में बच्चों को सामाजिक व्यवहार सीखने परेशानी होती है. खासतौर पर शेयरिंग. ऐसे बच्चे जल्दी अपनी वस्तुएं दूसरे बच्चों के साथ शेयर करने के लिए तैयार नहीं हो पाते, क्योंकि घर में उन्हें इतनी प्राइवेसी मिल चुकी होती है. अपने प्रत्येक सामान के वे अकेले मालिक हो होते हैं. बच्चे के तीन वर्ष के होने पर उनमें अच्छी आदतों का प्रवाह जरूरी है. इनमें शेयरिंग की आदत अव्वल है. यह समय उसके स्कूल जाने का होता है, क्योंकि स्कूल ऐसी जगह है, जहां बच्चों को जगह से ले कर कॉपी-किताबें, खाने-पीने का सामान तक दूसरे बच्चों से शेयर करना पड़ता है. ऐसे में यदि बच्चे में पहले से यह आदत नहीं है, तो उसे दिक्कत हो सकती है. हम आपको बताते हैं कि बच्चों में यह आदत कैसे डलवाएं…

घर का माहौल हो खुशनुमा
घर पर ही बच्चों को अपना सामान दूसरों से शेयर करने की आदत डलवाएं. खासतौर पर खाने-पीने की वस्तुओं में शेयरिंग की भावना का बहुत महत्व है. यदि घर में दो बच्चे हैं, तो दोनों को अलग-अलग एक ही सामान देने की जगह एक ही चीज दें. इसके बाद दोनों को बारी-बारी से उसे शेयर करने को कहें. इससे बच्चे में किसी भी चीज पर अधिकार जमाने और उसके लिए लड़ने जैसी भावना विकसित नहीं होगी. यदि घर में एक ही बच्चा है, तो उसे परिवार के बाकी सदस्यों के साथ शेयर करने की आदत डलवाएं.

Creating a Happy Atmosphere at Home
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बताएं किस वस्तु को करें शेयर

बच्चों को बताएं कि कौन सी वस्तुएं शेयर की जा सकती हैं? बच्चे अपने उस सामान को किसी से भी शेयर नहीं कर सकते जो उन के पास एक ही हो और सिर्फ उनके लिए ही लिया गया हो. आपको उन्हें बताना पड़ेगा, किस वस्तु को किसके साथ शेयर करना है. इससे क्या लाभ होगा. जैसे, बच्चों को बताएं, खिलौनों को अकेले खेलने से ज्यादा दोस्त के साथ खेलने में ज्यादा मजा आएगा. दरअसल, जो बच्चे अकेले रहते हैं, उन्हें अकेले खेलने में ही मजा आता है, लेकिन यह मानसिक, शारीरिक और व्यक्तिगत विकास पर बुरा प्रभाव डालता है.

इसलिए जरूरी है शेयरिंग

बच्चे चीजों को लेकर पजेसिव होते हैं. अपने सामान के साथ वह अलग कंफर्ट जोन बना लेते हैं. यह उन्हें विपरीत परिस्थितियों का सामना करने में असमर्थ बना देता है. शेयरिंग की भावना बच्चों में अहंकार की भावना प्रवेश नहीं करने देती. इतना ही नहीं, ऐसे बच्चे बड़े होकर व्यवहारकुशल और सहयोगी प्रवृत्ति के बनते हैं. ऐसे बच्चे पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में सफल भी रहते हैं.

Stop Telling Your Toddler to Share
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ऐसे डलवाएं आदत
बच्चों को ऐसी सिचुऐशन दें, जिसमें उसे सभी से सामान शेयर करने के लिए खुद ही पूछना पड़े. जैसे दो बच्चे हैं, तो एक को बैट और एक को बॉल दिलाएं. अब बैट के इस्तेमाल के लिए बॉल का होना जरूरी है, इसलिए बैट वाले बच्चे को बॉल के लिए बैट और बॉल वाले बच्चे से शेयर करना ही पड़ेगा. इसी तरह यदि बच्चा एक ही है, तो उसे दूसरे तरीके से शेयरिंग सिखाई जा सकती है.

भावनाएं भी करें शेयर

बच्चों को सिर्फ सामान ही नहीं, बल्किखुद से और दोस्तों से भावनाएं जाहिर करने का तरीका भी सिखाएं. कई बार बच्चे संकोची स्वभाव के होते हैं. चाहते हुए भी सहयोग मांगने में हिचिकचाते हैं, लेकिन उन्हें सिखाएं कि सहयोग देना और लेना दोनों ही अनिवार्य है.

जबरदस्ती नहीं 
बच्चों को डांट कर उनका सामान शेयर करने के लिए विवश न करें. इससे बच्चा चिड़चिड़ा हो जाएगा. उन्हें समझाएं, यदि वह अपना सामान दूसरे से शेयर करेंगे, तो दूसरे भी जरूरत पड़ने पर अपना सामान उनको इस्तेमाल करने देंगे.

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