88 साल के इतिहास में पहली बार वीडियो असिस्टेंट रेफरी की निगरानी में हो रहा है फीफा वर्ल्ड कप

Video Assistant Referee In FIFA World Cup

Video Assistant Referee system used for first time in Fifa World Cup 2018

Video Assistant Referee In FIFA World Cup
Video Assistant Referee In FIFA World Cup

फुटबॉल के मैच के दौरान कई बार यह विवाद का विषय बन जाता है कि गोल हुआ या नहीं. गोल की बात पर जब खिलाड़ी रेफरी के निर्णय से सहमत नजर नहीं आते हैं, तब इसके लिए वीएआर तकनीक का यूज किया जाता है, जिसका पूरा नाम वीडियो असिस्टेंट रेफरी है. इसकी मदद से मैदान में होने वाले निर्णयों को पहले से ज्यादा स्पष्ट और निष्पक्ष बनाने की कोशिश की जाती है. फिलहाल इसे केवल 4 तरह की स्थितियों- गोल हुआ या नहीं, पेनाल्टी देना है या नहीं, रेफरी द्वारा सीधे लाल कार्ड दिखाए जाने पर और लाल कार्ड दिखाया गया या पीला कार्ड इसमें गलतफहमी पैदा होने जैसी स्थितियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है.

रूस में 14 जून से शुरू हुए फुटबॉल वर्ल्ड कप में इस बार ऐसा हुआ है, जो फीफा वर्ल्ड कप के 88 साल के इतिहास में अब तक नहीं हुआ था. दरअसल, इस विश्व कप के हर मुकाबलों को रोचक बनाने और सटीक फैसले लेने के लिए इस विश्व कप में पहली बार वीडियो रेफरल का इस्तेमाल हो रहा है. मॉस्को में बने सेंट्रलाइज्ड वीडियो आॅपरेशन रूम से पीछे हर मैच पर 33 कैमरों और 15 स्क्रीन के जरिए नजर रखी जा  रही है.

फीफा की रेफरी कमेटी ने वीडियो रेफरल के लिए 13 लोगों की वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) यानी सहायक रेफरी प्रणाली टीम बनाई है. यह टीम वर्ल्ड कप के 32 टीमों के सभी 64 मुकाबलों में मैच अधिकारियों को सपोर्ट कर रही है. वीएआर टीम मॉस्को में एक सेंट्रलाइज्ड वीडियो आॅपरेशन रूम में बैठ रही है. यह टीम सभी रिलेवेंट ब्रॉडकास्ट कैमरों को एक्सेस कर सकेगी और आॅफसाइड कैमरों से संबद्ध कर रही है.

ऐसी है गोल लाइन तकनीक

फुटबॉल में विवादों के निबटारे के लिए गोल लाइन तकनीक का इस्तेमाल भी शुरू किया गया है. इसके तहत स्टेडियम में कई कैमरे लगाए जाते हैं, जिससे गेंद पर ज्यादा बारीकी से नजर रखी जाती है. इसके अलावा इस तकनीक का एक और तरीका विकसित किया गया है, जिसमें बॉल के अंदर कॉपर के तार लगाए जाते हैं.  इंटेलिजेंट गोल पोस्ट गेंद की लाइंस के साथ क्रॉस चुंबकीय क्षेत्र बनाता है, जो रेफरी की घड़ी से कनेक्ट होकर उस तक संदेश पहुंचाता है कि गोल हुआ है या नहीं. एक दूसरी तकनीक में गेंद में चिप लगाई गई है. टर्फ के नीचे केबल के जरिए गेंद के गोल में पहुंचते ही रेफरी तक संदेश पहुंचता है.

Video Assistant Referee.
Video Assistant Referee.

गोल पोस्ट के पास सात कैमरे

जिस तकनीक को फीफा ने स्वीकृति दी है, उसके तहत हर गोल पोस्ट के आसपास सात कैमरे लगाए जाते हैं. यानी कुल 14 कैमरे मैदान की छत के नीचे लगे होते हैं, जो फुटबॉल की 3डी पोजीशन को लगातार कैप्चर करता रहता है. जैसे ही बॉल लाइन को क्रॉस करती है रेफरी के हाथ में लगी घड़ी में वाइब्रेशन शुरू हो जाता है. अब तक जितनी भी तकनीक गोल पर नजर रखने के लिए बनाई गई हैं, वह सभी रेफरी की घड़ी से जुड़ी हुई होती हैं. लेकिन गोल कंट्रोल की इस 3डी तकनीक से एक सेकंड के अंदर रेफरी तक गोल की खबर पहुंच जाती है.

7 Camera Near Goal Line - Video Assistant Referee
7 Camera Near Goal Line – Video Assistant Referee

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