भगवान शिव अनंत शक्ति है जिनके जन्म के विषय मे कोई भी प्रमाण किसी भी पुराण में नही मिलता. वैसे तो शिवजी को महादेव, आदिनाथ, भोलेबाबा व भोलेनाथ कहा जाता है. वहीं, शिवजी इतने भोले है कि वे अपने भक्तों की छोटी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते है और उन्हें मनचाहा वरदान देते है. लेकिन, इनका जीवन और वेशभूषा बेहद रहस्यमयी है. तो चलिए आज हम आपको बताते रहस्मयी देवो के देव भोलेबाबा से जुड़ी कुछ रहस्मयी बातें.

Lord Shiv

नाग: जैसा कि हम सबको पता है शिव गले में नाग धारण करते है जो यह संदेश देता है कि इस धरती पर वो हर जीव से प्यार करते है. बता दें, शिव के गले में जो नाग लिपटा रहता है उसका नाम वासुकि है और वासुकि के बड़े भाई का नाम शेषनाग है.

त्रिनेत्र

त्रिनेत्र : परमेश्वर शिव त्रिकाल दृष्टा, त्रिनेत्र, आशुतोष, अवढरदानी, जगतपिता आदि अनेक नामों से जानें जाते हैं. भोलेनाथ ने समय और सृष्टि की रचना की हैं. संसार की सर्व मनोकामना पूर्ण करने वाले भगवान शिव भूत, भविष्य तथा वर्तमान तीनों के ज्ञाता है तथा उन्हें प्रत्यक्ष रूप से देख सकते है. महाप्रलय के समय शिव ही अपने तीसरे नेत्र से सृष्टि का संहार करते हैं. लेकिन बता दें, जगतपिता होकर भी शिव परम सरल व शीघ्रता से प्रसन्न होने वाले हैं.त्रिनेत्र

डमरू : शिव जी के डमरू से निकली ध्वनि से संस्कृत भाषा के व्याकरण का जन्म हुआ था. इसके अलावा, हृदय की धड़कन और ब्रह्मांड की आवाज में भी डमरू के स्वर मिले हुए हैं और इसे  अ, उ और म या ओम कहते हैं. बता दें, इसकी आवाज से आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियां भी दूर हो जाती है.

डमरू

त्रिशूल : भगवान शिव हमेशा त्रिशूल अपने साथ रखते हैं और इससे वो असुरो का संहार करते है. बता दें, त्रिशूल के तीन नुकीले सिरे तीनों कालों भूत, भविष्य और वर्तमान का प्रतीक है जो भोलेबाबा के अधीन है. इसके अलावा, त्रिशूल के तीन शुक्ल मनुष्य के अंदर के तीन तरह के पाप निकालकर उनका जीवन शुद्ध और सरल बनाते है.

Shiv Trishul

चन्द्रमा : शिव जी के शीश पर चन्द्र को धारण करने के पीछे एक रहस्य है, दरअसल जब चंद्र क्षय रोग से पीड़ित होकर मृत्युतुल्य कष्टों को भोग रहे थे. तब भगवान शिव ने उस दोष का निवारण कर उन्हें पुण्य जीवन प्रदान किया था. इसके अलावा, जब सागर मंथन में हलाहल विष निकला तो उसे महादेव ने अपने कंठ में धारण कर लिया था. जिस वजह से शरीर विष प्रभाव से अत्याधिक गर्म होने लगा. जिससे शिवजी ने अपने केश में चंद्र धारण कर लिया था जिससे शिवजी के शरीर को शीतलता मिलती है.

Lord Shiva is the story behind the moon you know

भस्म : शिव का पूरा शरीर ही भस्म से ढंका रहता है जो इस बात का प्रमाण है मनुष्य का शरीर नश्वर है और शरीर को भी एक दिन भस्म की तरह राख हो जाना है. जिंदगी के इस पड़ाव का शिव सम्मान करते है, जिस वज़ह से वह हर वक्त वो अपने शरीर पर भस्म लगाते है. इसके अलावा भगवान शिव कैलाश पर्वत पर निवास करते हैं जो कि बेहद ठंडा है और खुद को इस ठंड से बचाए रखने के लिए वो अपने शरीर पर भस्म लगाते है.Lord Shiv Bhasm

नंदी: नंदी बैल को भगवान शिव का प्रिय माना गया है और नंदी को भगवान शिव ने अपनी सवारी के रूप में भी चुना. नंदी के 4 चरण है जो मनुष्य की अवस्थाएं ( ब्रह्मचर्य, वामप्रस्थ, सन्यास, गृहस्थ ) और चार पुरुषार्थ ( धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) को प्रदर्शित करता है. इसलिए अगर आप भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहते हैं तो सबसे पहले उनके प्रिय को प्रसन्न कीजिए.

 

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