Thinking of Adoption – Here is All You Need to Know

Thinking of Adoption – Here is All You Need to Know
Img Source :Adoption dot com

देश में तमाम नि:संतान दंपत्ति हैं, जो बच्चा गोद लेना चाहते हैं, लेकिन तमाम कानूनी पचड़ों और बिचौलिये की भूमिका निभाने वाली संस्थाओं के चक्कर में फंस कर, वे इस काम में विफल हो जाते हैं. केंद्र सरकार ने बच्चा गोद लेने के नियमों में फेरबदल कर उन्हें आसान बनाया है. ये नियम 1 अगस्त 2015 से देश भर में लागू हुए हैं. आइएं जानते  हैं बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया

भारत सरकार के केन्द्रीय नियुक्त प्राधिकरण के अनुसार उअफअ सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (केंद्रीय दत्तक संसाधन प्राधिकरण) को दत्तक दिशानिदेर्शों के अनुसार भारतीय बच्चों को गोद लेने की सुविधा है.

  • 2015 में कुल 1959 बच्चे गोद लिये गए थे, जिसमें 718 लड़के थे और 1241 लड़कियां.
  • 2016 में कुल 3210 बच्चे गोद लिए गए थे.
Adoption Law In India
Adoption Law In India

गोद लेने के कानून

भारतीय कानून के हिंदू अडौप्शन ऐंड मेंटेनैंस एक्ट, 1956 के तहत सिर्फ हिंदू ही बच्चा गोद ले सकते थे, लेकिन अब दूसरे धर्म के लोग भी गार्जियन ऐंड वार्ड एक्ट, 1890 के तहत अर्जी दे कर बच्चा गोद ले सकते हैं.   19 फरवरी, 2014 को उच्चतम न्यायालय ने ‘किशोर न्याय (बच्चों की देख-रेख एवं संरक्षण) अधिनियम. 2006 में किए गए संशोधनों में वर्णित प्रावधानों की व्याख्या करते हुए अपने एक ऐतिहासिक निर्णय में यह व्यवस्था दी है कि किसी भी धार्मिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को बच्चा गोद लेने का अधिकार है.

गोद लेने-देने के नियम

  • 1956 में हिंदू अडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट बना. गोद संबंधी नियम और प्रक्रिया इसी में बताई गई है.
  • कानूनी जानकार मुरारी तिवारी के मुताबिक, कोई बालिग और दिमागी रूप से तंदरुस्त शख्स ही बच्चा गोद ले सकता है.
  • शादीशुदा कपल तो गोद ले ही सकते हैं, अगर शादीशुदा नहीं हैं तो भी बच्चा गोद ले सकते हैं.
  • अगर कोई पुरुष किसी बच्ची को गोद लेना चाहता है तो दोनों की उम्र में 21 साल का फर्क होना चाहिए.
  • यही नियम महिलाओं के लिए भी है. महिला अगर किसी लड़के को गोद ले रही है, तो उन दोनों के बीच भी 21 साल का फर्क होना जरूरी है.
  • अगर किसी के बेटा या पोता है, तो वह लड़का गोद नहीं ले सकता.
  • अगर किसी की बेटी है, पोती है या बेटी मर चुकी है, लेकिन उसकी बेटी (नातिन) है तो भी वह लड़की गोद नहीं ले सकता.
  • नैचरल पैरंट्स को यह हक है कि वे आपसी सहमति से अपने बच्चे को किसी और को गोद दे सकते हैं. अगर मां या बाप में से किसी एक को भी ऐतराज होगा, तो बच्चे को गोद नहीं दिया जा सकता.
  • उसी बच्चे को गोद दिया जा सकता है, जिसे पहले किसी और को गोद न दिया गया हो.
  • गोद दिए जाने के वक्त बच्चे की उम्र 15 साल से कम होनी चाहिए और वह शादीशुदा नहीं होना चाहिए.

कागजात रखें तैयार

  • जब भी एजेंसी से संपर्क करें, तो कागजात के बारे में पूरी जानकारी जरूर ले लें. इन्हें पहले से ही तैयार रखें, ताकि गोद लेने की प्रक्रिया के दौरान ज्यादा भागदौड़ न करनी पड़े :
  • बच्चा गोद लेने के लिए एजेंसी को पूरे परिवार के साथसाथ, अगर पहले से कोई बच्चा है, तो उस की भी फोटो देनी पड़ती है.
  • फोटो के साथ आप के आयु प्रमाणपत्र की भी मांग की जाती है. इस से लाभ यह होता है कि आप के लिए सही आयु वर्ग का बच्चा चुना जा सकता है. अकसर अधिक आयु वाले अभिभावकों को बड़े बच्चे दिए जाते हैं. इस से अभिभावक और बच्चे दोनों को सुविधा होती है.
  • बच्चा गोद लेने के लिए आप के पास अपने स्थायी पते के साथ ही हाल में आप जहां निवास कर रहे हैं उस पते का प्रमाणपत्र भी मांगा जाता है.
  • बच्चा गोद लेने के पीछे बताए गए कारणों में मुख्य कारण अगर बांझपन है, तो इस के लिए भी प्रमाणपत्र देना पड़ता है. इस प्रमाणपत्र के तौर पर स्त्री या पुरुष जो भी इस के लिए जिम्मेदार हो, उसे अपनी मैडिकल रिपोर्ट जमा करानी होती है.
  • इस के अलावा बच्चा गोद लेने के इच्छुक लोगों को अपना स्वास्थ्य प्रमाणपत्र भी देना पड़ता है. इसी के साथ एचआईवी और हेपेटाइटिस बी के निरीक्षण वाली ब्लड टैस्ट की रिपोर्ट भी देनी होती है. एक बात और जो ध्यान में रखना जरूरी है कि एचआईवी और हेपेटाइटिस बी की रिपोर्ट किसी विशेषज्ञ से लेनी जरूरी है.
  • विवाहित अगर बच्चा गोद ले रहे हों, तो उन्हें मैरिज सर्टिफिकेट देना होगा.
  • अगर आप तलाकशुदा हैं औरबच्चा गोद लेना चाहते हैं, तो भी आप को अपने तलाक के कागजात देने जरूरी होंगे.
  • बच्चे को गोद लेने के इच्छुक व्यक्ति से उस की चलअचल संपत्ति का स्टेटमैंट भी मांगा जाता है.
  • आप बच्चे की जिम्मेदारी उठाने लायक हैं, यह साबित करने के लिए आप को आय प्रमाणपत्र भी देना होता है.
  • एंप्लायमैंट लैटर के साथ वर्तमान में मिल रही तनख्वाह की पे स्लिप देनी पड़ सकती है.
  • अगर आप अपना बिजनैस करते हैं, तो आप से आईटी सर्टिफिकेट मांगा जाएगा.

 गोद की प्रक्रिया

  • गोद लेने की एक रजिस्टर्ड कानूनी प्रक्रिया होती है.
  • बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को संचालित करने वाले दिशा-निर्देश 2015’ की अधिसूचित 17 जुलाई, 2015 को दी गई थी. शिशु दत्तक ग्रहण संसाधन सूचना एवं दिशा-निर्देश प्रणाली के तहत आप आॅनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
  • प्रक्रिया के तहत गोद लेने के इच्छुक लोगों को cara.nic.in वेबसाइट पर जाकर रजिस्टर करना होगा.

बच्चे के कानूनी हक

  • जब किसी बच्चे को किसी और को गोद दिया जाता है तो बच्चे के नाम पर जो भी प्रॉपर्टी है, वह भी उसके साथ चली जाती है.
  • बच्चे के नाम कोई प्रॉपर्टी न हो और उसे गोद दिया जाए, तो गोद देने वाले के यहां से उसके सभी कानूनी हक खत्म हो जाते हैं और जिसने उसे गोद लिया है, वहां उसे तमाम कानूनी हक मिल जाते हैं.

Government Central Adoption Resource Authority Website : http://cara.nic.in/

Toll Free Number : 1800-11-1311

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