सिर्फ प्यूरीफाइट वॉटर से होगा महाकाल का जलाभिषेक सुप्रीम कोर्ट का आॅर्डर

RO Water For Ujjain Mahakal Temple Abhishekकरोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र महाकाल मंदिर, उज्जैन और शिवलिंग को क्षरण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना कर मानदंडो की घोषणा कर दी है. सुप्रीम कोर्ट ने उज्जैन के महाकाल ज्योतिर्लिंग मंदिर कमेटी के सुझावों को मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ज्योतिर्लिंग पर सिर्फ आरओ (फड) का ही पानी चढ़ाया जाएगा. साथ ही दूध और दूसरी पूजन सामग्री के प्रयोग को सीमित करने का भी आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि अगले साल जनवरी में कोर्ट स्थिति की दोबारा समीक्षा करेगा. बता दें कि महाकाल ज्योतिर्लिंग को क्षरण से बचाने के कोर्ट की ने एक कमेटी का निर्माण किया था. कमेटी ने कोर्ट को बताया था कि पूजा के दौरान महाकाल को चढ़ाई जा रही कुछ चीजों से शिवलिंग को नुकसान हो रहा है.
सारिका गुरु ने की थी याचिका दायर
शिवलिंग को नुकसान से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता सारिका गुरु ने याचिका दायर की थी. याचिका में सामाजिक कार्यकर्ता सारिका गुरु ने कहा था कि भक्तों को गर्भ गृह में जाने और शिवलिंग को स्पर्श करने की इजाजत नहीं होनी चाहिए. देश के कई ज्योतिर्लिंगों में भक्तों को गर्भ गृह में जाने नहीं दिया जाता है. याचिका में ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाने, पंचामृत श्रृंगार और अन्य पूजा सामग्रियों को नुकसान के लिए जिम्मेदार बताया गया था. वहीं कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में माना था कि मुख्य शिवलिंग और मंदिर परिसर अपने मूल रूप में नहीं हैं. इसे कई वजहों से नुकसान पहुंचा है. इसके लिए भारी भीड़ और पूजा सामग्री के भी जिम्मेदार है. सारिका गुरु ने की थी याचिका दायर
पानी के बैक्टीरिया क्षरण का कारण
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और भारत के भूगर्भीय सर्वेक्षण को समस्या का अध्ययन करने के लिए कहा गया था. यह निष्कर्ष निकाला गया था कि जो पानी पेश किया जा रहा था उसमें बैक्टीरिया थे जो क्षरण का कारण है.पानी के बैक्टीरिया क्षरण का कारण
सिर्फ 500 मिली पानी से अभिषेक
आपको बता दें कि कमेटी ने मांग की थी कि पुजारियों के अलावा किसी को गर्भ गृह में न जाने दिया जाए. ज्योतिर्लिंग पर लगातार जल चढ़ने से इसे नुकसान पहुंचता है, अत: जल के प्रयेग को सीमित किया जाए. पानी की मात्रा 500 मिलीलीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए. यह भी बताया गया है कि ‘भस्मी आरती’ के दौरान शिवलिंग को शुष्क सूती कपड़े से ढंकना है क्योंकि राख लिंग को बहुत बुरी तरह प्रभावित कर रही है. दूध और घी जैसी पूजा सामग्रियों का केवल प्रतीकात्मक रूप से प्रयोग हो. प्रत्येक भक्त को ‘अभिषेक’ को निश्चित मात्रा में दूध या ‘पंचामृत’ चढ़ाने की अनुमति दी जाएगी. मंदिर परिसर, मूर्तियों और पुरातात्विक महत्व की चीजों का संरक्षण वैज्ञानिक तरीके से किया जाए.सिर्फ 500 मिली पानी से अभिषेक

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