Mysteries of Indian Temples that are Beyond the Explanation of Science

10 Mysterious Temple
10 Mysterious Temple

ऋषियों की भूमि भारत में कई ऐसे रहस्य हैं, जो आज तक अनुसलङो हैं. कई रिसर्च के बाद भी वैज्ञानिक नतीजे पर नहीं पहुंच सके. जी हां, ऐसे ही रहस्यों से भरे हैं यहां के कुछ मंदिर. इनका संबंध न तो वास्तु से है, न खगोल विज्ञान से और न ही खजाने से. इन मंदिरों का रहस्य आज तक कोई जान पाया. जानते हैं इन मंदिरों के बारे में..

करणी माता का मंदिर , बीकानेर 

करणी माता के मंदिर में करीब 20 हजार काले चूहे रहते हैं. लाखों की संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु यहां आते हैं. करणी देवी को दुर्गा का अवतार माना जाता है. इस मंदिर को ‘चूहों वाला मंदिर’ भी कहते हैं. यहां चूहों को काबा कहते हैं. जी हां, आने वाले श्रद्धालु इन्हें बाकायदा भोजन कराते हैं. यहां इतने चूहे हैं, पांव घिसटकर चलना पड़ेगा. अगर एक चूहा भी पैरों के नीचे आ गया, तो अपशकुन माना जाता है.

करणी माता का मंदिर , बीकानेर
करणी माता का मंदिर , बीकानेर

कन्याकुमारी देवी मंदिर

कन्याकुमारी प्वांइट को देश का सबसे निचला हिस्सा माना जाता है. यहां समुद्र तट पर कुमारी देवी का मंदिर है. यहां मां पार्वती के कन्या रूप को पूजा जाता है. यह देश में एकमात्न ऐसी जगह है, जहां मंदिर में प्रवेश करने के लिए पुरुषों को कमर से ऊपर के कपड़े उतारने पड़ते हैं. मान्यता है, इस जगह देवी का विवाह संपन्न न हो पाने के कारण बचे दाल-चावल बाद में कंकड़-पत्थर बन गए थे. इसलिए कन्याकुमारी के बीच या रेत में दाल और चावल के रंग-रूप वाले कंकड़ बहुत मिलते हैं. कन्याकुमारी ‘सनराइज’ दृश्य के लिए प्रसिद्ध है. शाम को अरब सागर में डूबते सूरज को देखना भी यादगार है.

कन्याकुमारी देवी मंदिर
कन्याकुमारी देवी मंदिर

मेरू रिलीजन स्पॉट, कैलाश पर्वत

मान्यता है, यहां भगवान महादेव स्वयं विराजमान हैं. यह धरती का केंद्र है. कैलाश मानसरोवर के पास ही कैलाश और आगे मेरू पर्वत स्थित है. यह संपूर्ण क्षेत्न शिव और देवलोक कहा गया है. इस स्थान की महिमा वेद और पुराणों में भी है. कैलाश पर्वत समुद्र तल से 22,068 फुट ऊंचा है. हिमालय के उत्तरी क्षेत्न में तिब्बत में स्थित है. चूंकि तिब्बत चीन के अधीन है, अत: कैलाश चीन में आता है, जो चार धर्मों- तिब्बती धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिन्दू का आध्यात्मिक केंद्र है. कैलाश पर्वत की चार दिशाओं से चार नदियों का उद्गम हुआ है, जिनमें  ब्रह्मपुत्न, सिंधु, सतलज व करनाली हैं.

मेरू रिलीजन स्पॉट, कैलाश पर्वत 
मेरू रिलीजन स्पॉट, कैलाश पर्वत

शनि शिंगणापुर 

महाराष्ट्र के अहमदनगर में स्थित शिंगणापुर में यहां शनिदेव की पाषाण प्रतिमा बगैर छत्न या गुंबद के खुले आसमान के नीचे संगमरमर के चबूतरे पर विराजित है. माना जाता है, श्ंिागणापुर में भगवान शनि का खौफ इतना है, शहर के अधिकांश घरों में खिड़की, दरवाजे और तिजोरी नहीं हैं. दरवाजों की जगह यदि लगे हैं, तो केवल पर्दे. ऐसा इसलिए, क्योंकि यहां चोरी नहीं होती. कहा जाता है, जो भी चोरी करता है, उसे शनि महाराज स्वयं सजा देते हैं.

शनि शिंगणापुर
शनि शिंगणापुर

सोमनाथ मंदिर

यह देश के 12 ज्योर्तिलिंगों में शामिल है. प्राचीनकाल में इसका शिवलिंग हवा में झूलता था, लेकिन आक्र मणकारियों ने इसे तोड़ दिया. माना जाता है, 24 शिवलिंगों की स्थापना की गई थी, उसमें सोमनाथ का शिवलिंग बीचोबीच था. इन शिवलिंगों में मक्का स्थित काबा का शिवलिंग भी शामिल है. इनमें से कुछ  कर्क रेखा के नीचे आते हैं. गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्न के वेरावल बंदरगाह में स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है, इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था. इसका उल्लेख ऋग्वेद में भी है. यदुवंशियों के लिए यह प्रमुख स्थान था. कहा जाता है, मंदिर को अब तक 17 बार नष्ट किया गया है. हर बार इसका पुनर्निर्माण किया गया.

Somnath Temple Mystery
Somnath Temple Mystery

कामाख्या मंदिर 

असम के गुवाहाटी में स्थित इस मंदिर को तांत्रिकों का गढ़ कहा गया है. माता के 51 शक्तिपीठों में से एक इस पीठ को महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां त्रिपुरासुंदरी, मतांगी और कमला की प्रतिमा स्थापित है. दूसरी ओर सात अन्य रूपों की प्रतिमा अलग-अलग मंदिरों में हैं, जो मुख्य मंदिर को घेरे है. मान्यता है, साल में एक बार अम्बूवाची पर्व के दौरान मां भगवती रजस्वला होती हैं. मां भगवती की गर्भगृह स्थित महामुद्रा (योनि-तीर्थ) से निरंतर तीन दिनों तक जल-प्रवाह के स्थान से रक्त प्रवाहित होता है.

कामाख्या मंदिर
कामाख्या मंदिर

अजंता-एलोरा के मंदिर

अजंता-एलोरा की गुफाएं महाराष्ट्र के औरंगाबाद के समीप स्थित हैं. ये गुफाएं बड़ी-बड़ी चट्टानों को काटकर बनाई गई हैं. 29 गुफाएं अजंता में और 34 गुफाएं एलोरा में हैं. इन्हें वर्ल्ड हेरिटेज के रूप में संरक्षित किया गया है. इन्हें राष्ट्रकूट वंश के शासकों ने बनवाया था. यहां ऋ षि-मुनि तपस्या और ध्यान करते थे. सह्याद्रि की पहाड़ियों पर स्थित इन 30 गुफाओं में करीब पांच प्रार्थना भवन और 25 बौद्ध मठ हैं. इनमें 200 ईसा पूर्व से 650 ईसा बाद तक के बौद्ध धर्म का चित्नण है. गुफाओं में हिन्दू, जैन और बौद्ध तीन धर्मों के प्रति दर्शाई गई आस्था के त्रिवेणी संगम है.

अजंता-एलोरा के मंदिर
अजंता-एलोरा के मंदिर

खजुराहो का मंदिर

उस काल के राजा ने सेक्स को समर्पित मंदिरों की श्रृंखला बनवाई? यह रहस्य आज भी बरकरार है. खजुराहो वैसे तो मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित छोटा-सा कस्बा है, फिर भी भारत में सबसे ज्यादा देखे और घूमे जाने वाले पर्यटन स्थलों में यह दूसरे नंबर पर है. इन मंदिरों का निर्माण चंदेल शासकों ने 900 से 1130 ईसवीं के बीच करवाया था. माना जाता है, कला पारखी चंदेल राजाओं ने करीब 84 बेजोड़ व लाजवाब मंदिरों का निर्माण करवाया था, लेकिन उनमें से सिर्फ 22 मंदिरों की ही खोज हो पाई है। ये मंदिर शैव, वैष्णव और जैन संप्रदायों से संबंधित हैं.

खजुराहो का मंदिर
खजुराहो का मंदिर

उज्जैन का काल भैरव मंदिर 

यहां की काल भैरव की मूर्ति मदिरापान करती है, इसीलिए यहां मंदिर में प्रसाद की जगह शराब चढ़ाई जाती है. यही शराब प्रसाद के रूप में भी बांटी जाती है. कहा जाता है, काल भैरव नाथ इस शहर के रक्षक हैं.  मंदिर के बाहर वर्षभर 24 घंटे शराब उपलब्ध रहती है.

उज्जैन का काल भैरव मंदिर
उज्जैन का काल भैरव मंदिर

ज्वाला देवी मंदिर 

यह मंदिर हिमाचल के कांगड़ा घाटी के दक्षिण में 30 किमी दूर स्थित है. यह मां सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है. माना जात है, यहां माता की जीभ गिरी थी. हजारों वर्षों से यहां स्थित देवी के मुख से अग्नि निकल रही है. मंदिर की खोज पांडवों ने की थी. इस जगह का अन्य आकर्षण तांबे का पाइप भी है, जिसमें से प्राकृतिक गैस का प्रवाह होता है. मंदिर में अलग अग्नि की अलग-अलग नौ लपटें हैं, जो अलग-अलग देवियों को समर्पित हैं. साइंटिस्ट के अनुसार यह मृत ज्वालामुखी की अग्नि हो सकती है. कहते हैं, सतयुग में महाकाली के भक्त राजा भूमिचंद ने स्वप्न से प्रेरित होकर यह मंदिर बनवाया था.

ज्वाला देवी मंदिर
ज्वाला देवी मंदिर

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