मध्यप्रदेश का मैहर माता का मंदिर बहुत ही प्रसिद्द आज भी होती है देवी की पूजा

ये मंदिर मध्यप्रदेश के सतना जिले में स्थित है ये मैहर की माता शारदा का मंदिर है भक्तो का ऐसा कहना है की जब शाम की आरती हो जाती है उसके बाद इस मंदिर में माता के प्रिय भक्त आल्हा यहाँ पर आते है और पूजा करते है ऐसा होता है इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की रात में बंद मदिर से घंटी और पूजा करना की आवाज आती है जिससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है |
इस मंदिर का निर्माण 522 ईसा पूर्व हुआ था ये मंदिर पिरमिड आकार के त्रिकूट पर्वत पर स्थित है ऐसा माना जाता है की न्रपल देव ने चतुर्दशी के दिन सामदेवी को वहां स्थापित किया था उसके बाद से ही वहां पूजा अर्चना की जाती है |


माँ शारदा की प्रतिमा के निचे एक शिलालेख है जिसमे लिखे लेख को आजतक को पढ़ नहीं पाया है इसलिए वो अभी तक पहलियो में ही सिमटा हुआ है इस मंदिर जीवो की बलि देना सख्त मना है वर्ष 1922 में महाराजा ब्रजनाथ सिंह जूदेव ने ये घोषित किया था |
इस मंदिर में ये माना जाता है की माँ शारदा की सबसे पहली पूजा शंकराचार्य ने की थी और इस पर्वत का उल्लेख भारत के कई पुराणों में मिलता है |
यहाँ के पंडित मोहनलाल द्वेदी बताते है की 9 वी और 10 वी सदी के शिलालेख अभी तक कोई भी नहीं पढ़ पाया है | मंदिर के पीछे इतिहास के दो योद्धाओं और देवी भक्त आल्हा उदल के अखाड़े है और यहाँ एक तालाब और मंदिर भी है उस मंदिर में अमरत्व का वरदान प्राप्त आल्हा की तलवार और उनके विशाल प्रतिमा रखी हुई है |


वहां के महंत पंडित बताते है की यहाँ अब भी माँ का पहला श्रृंगार आल्हा ही करते है जब मंदिर खोला जाता है तो पूजा अर्चना के निशान इस बात का सबूत है इस रहस्य को सुलझाने की सभी ने बहुत कोशिश करली है और उनकी ये कोशिश अभी भी जारी है देखते कभी इस रहस्य से पर्दा उठ भी पायेगा क्या |

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