केदारनाथ मूवी रिव्यू

रेंटिग – 2.5

निर्देशकः अभिषेक कपूर

कलाकार –  सारा अली खान, सुशांत सिहं

अवधि – 2 घंटे 25 मिनट

अभिषेक कपूर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘केदारनाथ’ में बॉलीवुड स्‍टार सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान लीड रोल में नज़र आएंगें. मुंबई में हुई इस मूवी की स्पेशलस्क्रीनिंग में बॉलीवुड की यूथ ब्रिगेड के अलावा कई नामी सितारों ने भी इस मौके पर शिरकत की और हर किसी ने सारा अली खान की जमकर तारीफ की. हालांकि ये सारा की पहली फिल्म है लेकिन क्लाइमेंस में सारा अली खान का अद्भुत अंदाज देखने को मिला.

कहानी : डायरेक्टर अभिषेक कपूर ने उत्‍तराखंड के केदारनाथ की पृष्‍ठभूमि पर बनी इस फिल्म में जहां एकतरफ त्रासदी का भयानक रूप दिखाया है, तो वहीं दूसरी तरफ, इसी त्रासदी के बीच एक बेहद प्यारी लव स्टोरी भी बुनी है.इस फिल्म की कहानी में भी प्यार के बीच मज़हब की लकीर को आड़े लाया गया है. दरअसल, फिल्म में सारा एक पुजारी की बेटी और  सुशांत एक मुसलमान पिट्ठू की भूमिका निभा रहे है. यह दोनों केदारनाथ के आसपास के ही रहने वाले हैं. दोनों के बीच पहले मुलाकातें होती है और फिर बेपनाह मोहब्बत लेकिन जब दोनों के परिवार वालों को उनके प्यार के बारें में पता चलता है तो वह इन दोनों के मिलने पर पाबंदी लगा देते हैं.

 

ऐक्टिंग : सुशांत सिंह राजपूत और सारा अली खान अपने किरदार में पूरी तरह से उतरें और दोनों की एक्टिंग अविश्वसनीय रही. लेकिन सारा अली खान ने अपनी मां अमृता सिंह की सारी अदाएं समेट ली और पहली ही फिल्म में उनकी शानदार एक्टिंग ने सबका दिल छू लिया. वैसे सुशांत सिंह राजपूत भी ब्रिलियंट रहे लेकिन उनके लिए इस फिल्म में कुछ करने के लिए ज्यादा नही था. उन्हें किसी किसी जगह पर देखकर ऐसा लग रहा था मानो वह सिर्फ सारा अली खान को सपोर्ट करने के लिए ही फिल्म में हैं.

निर्देशन: हिंदी सिनेमा में लव स्टोरी का मतलब है इजहार, इकरार और जमाने का इंकार. हालांकि इस फिल्म की कहानी भी इन तीनों दौर से गुजरती है. लेकिन फ़िल्म की स्टोरी बहुत तेज़ है जिस वजह से इन दोनों की लवस्टारी को थोड़ा उभरने के लिए वक्त चाहिए . ऐसे में फिल्म अटकती है तो अधूरे इमोशन्स पर. इस फिल्म में धर्म और आस्था पर भी सवाल उठाते हुए यह दिखाया गया है किस तरह से तीर्थ स्थलों पर व्यापार होता हैं. बात करें, अभिषेक कपूर के डायरेक्शन की तो वो इतना बुरा नही है. लेकिन जितनी मजबूत कहानी का साथ उन्हें रॉक ऑन या काय पो छे में मिला था शायद यह फिल्म उनके मुकाबले में थोड़ी कमज़ोर है. फिल्म में विजुअल इफेक्ट्स और फोटोग्राफी बेहतरीन हैं.

संगीत: फिल्म को सबसे ज्यादा अगर किसी चीज़ ने नुक्सान पहुंचाया है तो वो है अमित त्रिवेदी के संगीत ने, दरअसल फिल्म के किसी भी गानें में ना तो कुमाउंनी या गढ़वाली टच है और यह प्यार के दर्द को भी सही ढ़ग से बयां नही कर पाया. वहीं, अरिजीत सिंह के दोनों गाने काफिराना और जां निसार भी औसत से ऊपर नहीं जाते.

क्यों देखें: फ़िल्म में बेहतरीन पल कम ही हैं लेकिन नई हीरोइन को देखना हो तो फिल्म केदारनाथ बुरी नहीं है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *