Mary Kom
Mary Kom

यह मैरी कॉम की  अदम्य भावना है कि उसे एक असली लड़ाकू बना दिया है. उनके मेहनती प्रयासों से उन्होंने जीवन की हर बाधा जीवन पर दूर फेंक दिया है. जीवन के प्रति उनके जुनून की वजह से उन्होंने असंभव को संभव में बदला है अन्यथा भारत में मणिपुर के एक अनसुने गांव से एक लड़की ओलंपिक के लिए  कैसे तैयार सकती है? गरीबी में गुजरे बचपन से भारत में शीर्ष 100 सेलिब्रिटी फोर्ब्स की सूची में जगह बनाने और अपने जीवन पर एक बॉलीवुड फिल्म बनाने के लिए निश्चित रूप से 5 बार अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियन मैरी कॉम के लिए आसान नहीं रहा होगा.

आइए जानते है उनकी लाइफ के बारे में कुछ अनसुने फैक्ट.

रही है स्कूल ड्रॉप आउट

मैरी कॉम को मंगते परिवार ने बहुत मुश्किलों से क्रिश्चियन मॉडल हाई स्कूल तथा सेंट जेवियर, मोइरांग, मणिपुर के स्कूल में शिक्षा दिलाई.  मैरी कॉम ने आदिमजाति हाईस्कूल, इम्फाल में हाई स्कूल की परीक्षा दी थी लेकिन वह इस परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हों सकीं . वह इस स्कूल की परीक्षा में दोबारा नहीं बैठना चाहती थीं, अत: उन्होंने स्कूल न जाने का निर्णय लिया और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय से परीक्षा देने का निर्णय लिया.

Although a school dropout
Although a school dropout

मणिपुर के बॉक्सर से प्रेरित

बचपन से ही मैरी कॉम को एथलेटिक्स में दिलचस्पी थी और मणिपुर के डिंगको सिंह को जब दन्होंने 1997 के एकशन गेम्स में गोलड जीतते हुए देखा तो दन्होने बॉक्सिंग का अपने खेल के रुप में चुना डिंगको सिंह ने उन्हें बॉक्सर बनने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने अपना प्रशिक्षण एम.नरजित से लेना शुरू किया, जो मणिपुर राज्य के बॉक्सिंग कोच था.

परिवार का नहीं था सपोर्ट

बॉक्सिंग की ट्रेनिंग शुरु करने पर मैरी कॉम ने अपने घर पर से बात नहीं बताई. उनके घर में बॉक्सिंग को महिलाओं का खेल नही माना जाता था. इसलिए उनके बॉक्सिंग को घरवालों का सपोर्ट नहीं मिल रहा था. यहां तक की उनकी पहली जीत की खबर जब लोकल अखबार में आई तो उनके पिता जो एक गरीब भूमिहीन किसान के तौर पर काम करते थे उनहोने मेरी कॉम को खूब डांट लगाई. बॉक्सिंग में करियर बनाने की बात पर परिवार के लोगों सहमत न हुए तो उन्होंने छिपकर 1999 से 2000 तक ट्रेनिंग ली. वर्ष 2000 में मैरी कॉम ने मणिपुर में हुई वीमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जीत हासिल की और उन्हें बॉक्सर का अवार्ड दिया गया. इसके बाद पश्चिम बंगाल में हुई वीमेन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया.

Mary Kom Family
Mary Kom Family

एआइबीए वीमेन बॉक्सिंग की 5 बार चैंपियन

वर्ष 2001 से उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करियर की शुरआत की. उस समय उनकी उम्र महज 18 वर्ष थी. उन्होंने अमेरिका में आयोजित एआइबीए वीमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप के 48 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता. वर्ष 2002 में 45 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक, वर्ष 2002 में ही विच वाय में स्वर्ण पदक, 2003 में 46 किलोग्राम वर्ग में एशियाई महिला चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, 2004 में 41 किलोग्राम वर्ग की महिला बॉक्सिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, वर्ष 2005 में महिला मुक्केबाजी में स्वर्ण पदक और एशियाई महिला चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीता. वर्ष 2006 में डेनमार्क में आयोजित वीनस वीमेन बॉक्स कप एवं भारत में आयोजित एआइबीए वीमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता. वहीं, लंदन में आयोजित ओलंपिक मैरी कॉम ने ब्रांज मेडल जीता था. वर्ष 2014 के एशियाई खेलों में 51 किलोग्राम वर्ग में भी स्वर्ण जीता लेकिन, रियो ओलंपिक में क्वालीफाई नहीं कर पाई तो कयास लगाए गए कि उनका करियर खत्म होने की कगार पर है, पर उन्होंने आठ नवंबर 2017 को एशियाई चैंपियनशिप के 48 किलोग्राम वर्ग में पांचवा स्वर्ण पदक हासिल किया.

5 times world boxing champion
5 times world boxing champion

मिले है कई सम्मान

मैरी कॉम का पूरा जीवन उतार चढ़ाव के साथ उपलब्धियों से भरा रहा. इसी वजह से उन्हें वर्ष 2003 में अर्जुन अवार्ड, 2006 में पद्मश्री, वर्ष 2007 में खेल रत्न के लिए नामांकन, 2007 में ही लिम्का बुक रिकॉर्ड द्वारा पीपल आॅफ द ईयर सम्मान, 2008 में रियल हॉर्स अवार्ड, यूथ आइकॉन एवं 2009 में राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा गया. वहीं, 2010 में सहारा स्पोर्ट्स अवार्ड की ओर से स्पोर्ट्स वीमेन आॅफ दि ईयर का अवार्ड, 2013 में पदम भूषण से पुरस्कृत किया गया और 2011 में भी एआइबीए लीजेंड अवार्ड से सम्मानित किया गया. इसके अलावा उन्हें एआइबीए द्वारा मैग्नीफिसेंट मैरी की उपाधि दी गई है.

Medals won by Mary Kom
Medals won by Mary Kom

जीवन पर बनीं फिल्म

मैरी कॉम एकमात्र ऐसी महिला हैं, जिन्होंने अपनी सभी छह विश्व प्रतियोगिताओं में पदक जीता है. इनकी उपलब्धियों एवं लोकप्रियता को देखते हुए मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स रियलिटी शो सुपर फाइट लीग ने उन्हें अपना ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया. उनके जीवन संघर्ष पर बॉलीवुड में फिल्म मैरी कॉम भी बनी, जिसमें बरेली की बेटी प्रियंका चोपड़ा ने मैरी कॉम की भूमिका अदा की, जिसे लोगों ने खूब सराहा.

Mary Kom- The Movie
Mary Kom- The Movie

बनाई बॉक्सिंग एकेडमी

मैरी कॉम का विवाह के ओंलर कॉम से वर्ष 2005 में हुआ. वह शीर्ष स्तर की मुक्केबाज होने के साथ ही तीन बच्चों की मां होने का दायित्व भी पूरी निष्ठा से निभाती हैं. 35 वर्ष की मैरी कॉम राज्यसभा की सांसद भी हैं. साथ ही  मैरीकॉम ने मणिपुर के पश्चिमी इंफाल जिले में रीजनल बाक्सिंग फाउंडेशन नाम की अकादमी बनाई है.मैरीकॉम की यह अकादमी 3.3 एकड़ में है. मैरीकॉम फिलहाल 45 मुक्केबाजों को प्रशिक्षण दे रही हैं. इनमें 20 महिला मुक्केबाज शामिल हैं.

Mary Kom Boxing Academy
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