हर बीता लम्हा याद बन जाता है,कभी खुशी तो कभी गम बन जाता है. यह खट्टी मीठी यादें ही है जो हमें यह अहसास दिलाती है कि समय कितनी तेज रफ्तार के साथ भागता चला जाता है. जो पल आज हम जी रहे है वो आने वाले कल की हसीन यादें होगी. ऐसी ही हमारी कुछ यादें जुड़ी हुई है 90 के दशक के मशहूर सीरियलस के साथ…

चंद्रकांता- नीरजा गुलेरी ने देवकी नंदन खत्री के उपन्यास पर आधारित इस सीरियल को बड़े ही रोचक और नाटकीय ढ़ग से पर्दे पर पेश किया था. इस सीरियल का शीर्षक गीत इतना आर्कषक था कि कोई भी इसे गुनगुनाने पर मजबूर हो जाता था, आज भी इस सीरियल का एक किरदार ‘यकू’ भूलाए नही भूलता.

मालगुडी डेज- आर के नारायण की कृति पर आधारित इस धारावाहिक का उस दौर के बच्चों पर काफी गहरा प्रभाव पड़ा था. इस धारावाहिक में स्वामी एडं फ्रेडस और वेंडर आफ स्वीट्स जैसी लघु कथाएं और उपन्यास शामिल थे.

मालगुड़ी डेज

सुरभि- सुरभि 90 के दशक का सबसे अधिक चलने वाला सांस्कृतिक धारावाहिक था. इस शो को रेणुका शहाने और सिद्धार्थ कक मिलकर होस्ट करते थे.

हम पाँच- इस सीरियल की माथुर फैमिली को ऑडियंस बेहद प्यार करती थी. एक दौर था जब सारी फैमिली एकसाथ बैठकर टीवी पर इस शो को इंजाय करते हुए यह लाइन दोहराती थी, “ यह न.1, यह न. 2 यह न. 3 यह न. 4 यह न. 5 हम पाँच पम पम पाँच” !

हिप-हिप हुर्रे- यह शो 12वीं कक्षा के छात्रों के जीवन, उनके रिश्ते की सम्स्याओं, बातचीत, विफलताओं और सफलताओं पर आधारित था. इस सीरियल के जरिए कई नए चेहरों को एक नई पहचान मिली.

फ्लॉप शो-  इस शो में जसपाल भट्टी नाटक और रेखाचित्रों के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक समस्याओं पर व्यंग्य प्रस्तुत करते हुए अपनी पत्नी सविता भट्ट के साथ नजर आए.

देख भाई देख- इस सीरियल की कहानी मुंबई में विशाल बंगले में रहने वालें दीवान परिवार की तीन पीढ़ियों के ईद- गिर्द घूमती रहती है. यह धारावाहिक जया बच्चन द्वारा लिखा और आंनद महेंद्रू के जरिए निर्देशित किया गया था.dekh bhai dekh - देख भाई देख

सर्कस- यह धारावाहिक सर्कस मंडली के लोगों के जीवन पर आधारित था. इसमें बॉलीवुड के बादशाह यानि शाहरुख खान नें सर्कस मालिक के बेटे की भूमिका निभाई थी.

चित्रहार- भला चित्रहार को कौन भूल सकता है ! चित्रहार 90 के दशक में सबसे ज्यादा पंसद किए जाने वाला बॉलीवुड के गानों पर आधारित कार्यक्रम था.

शक्तिमान- यह सीरियल भारतीय काल्पनिक सुपरहीरो पर आधारित था..इसे देखने के लिए अक्सर बच्चे स्कूल ना जाने के कई बहाने बनाते थे और घर के बेड पर गोल-गोल घूमकर गायब होने का प्रयास करते थे.

शक्तिमान - Shaktiman

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