वैसे तो शराब पीना सेहत के लिए हानिकारक है. वहीं, कई लोगों को खुशी हो या गम बस बियर पीने का बहाना चाहिए क्योंकि बियर शराब की तुलना में काफी सस्ती होती है. लेकिन, क्या कभी आपने सोचा है कि ज्यादातर ब्राण्ड के बियर या तो भूरे रंग कि बोतलों में या फिर हरे रंग की बोतलों में ही क्यों मिलती है?

दरअसल,  पहले बीयर कांच की पारदर्शी बोतलों में सर्व की जाती थी लेकिन फिर इसे भूरे रंग की बोतलों में परोसा जाने लगा. बता दें, पहले बीयर कांच की पारदर्शी बोतलों में बेची जाती थी. लेकिन, कुछ समय बाद कंपनियों को इसका आभास हुआ कि बियर में मौजूदा एसिड जब सूर्य की अल्ट्रा वॉयलेट किरणों के संपर्क में आया, तो रिएक्शन होने लगा. जिस वजह से उनमें अजीब सी गंध आने लग गई और उसका स्वाद भी खराब होने लगा. इस दौरान कंपनियों को ऐसा रंग तलाशना था जिसमें सूर्य की किरणों से बीयर को नुकसान न हो. इसके लिए भूरे रंग की बोतलों का चयन किया गया क्योंकि यह रंग काफी गहरा होता है और वो हानिकारक किरणों को ब्लॉक कर देता है, जिससे बीयर अधिक समय के लिए फ्रेश रहती है.

परंतु, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भूरे रंग की बोतलों की कमी हो गई, इसलिए कंपनियों को कोई दूसरा रंग ढूंढना पड़ा और वो रंग हरा था. बस फिर क्या था बियर को बचाने के लिए इसकी पैकिंग भूरे और हरे रंग कि बोतलों में की जाने लगी. जानकारों की मानें तो , असल में हरा रंग और भूरा रंग सूर्य की किरणों का विरोध करता है और जल्दी उनके सम्पर्क में नहीं आता. जिस वजह से इन्हें धूप में रखने पर भी इनमे से गंध नहीं आती और ना ही बियर का स्वाद बदलता है.

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