हिंदू धर्मग्रंथों में वर्णित सात वो महामानव जो आज भी अजर-अमर हैं और इस धरती पर मौजूद हैं, ऐसे महामानवों में से एक पवनपुत्र हनुमान भी है. दरअसल, भगवान हनुमान को कभी ना मरने का वरदान दिया गया था अर्थात उन्हें अमर का वरदान दिया गया था. परंतु, उनके जीवित होने के कोई प्रमाण अभी तक नहीं मिले है. हाल ही में सूत्रों की मानें तो श्रीलंका के जंगलों में हनुमान जी की मौजूदगी के संकेत मिले हैं.

दरअसल, श्रीलंका के जंगलों में ‘मातंग’ नाम की जनजाती निवास करती है और इस जाति के लोगों का कहना है कि भगवान उन लोगों से मिलने के लिए आज भी आते है. बता दें, इस जाति की संख्या बेहद कम है और भगवान हनुमान 4 साल पहले इस जनजाति के लोगों से मिलने के लिए आए थे और उन लोगों को कहना है कि भगवान हनुमान अब वह 41 साल बाद यानी 2055 में फिर से उनसे मिलने के आएंगे.

बता दें, इस कबीले का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है हिंदू शास्त्रों में बताया गया है कि भगवान राम के स्वर्ग सिधारने के बाद हनुमान जी अयोध्या से लौटकर दक्षिण भारत के जंगलों में लौट आए. उसके बाद उन्होंने फिर से समुद्र लांघा और श्रीलंका पहुंचे. उस समय हनुमान जी जब तक श्रीलंका के जंगलों में रहे, मांतग जाति के समुदाय ने उनकी बेहद सेवा की. हनुमान जी ने इस कबीले के लोगों को ब्रह्मज्ञान का बोध कराया. उन्होंने यह भी वादा किया कि वे हर 41 साल बाद इस कबीले की पीढियों को ब्रह्मज्ञान देने आएंगे.

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