Pandav Shila

देवभूमि के लोगों की आस्था और विश्वास को देखकर लगता है कि यहां का देव समाज इन्हीं के बल पर टिका हुआ है. वहीं, आज हम आपको हिमाचल के मंडी जिला के जंजैहली गांव से तीन किलोमीटर पहले बाखली खड्ड के किनारे स्थित एक विशालकाय चट्टान के बारें में बताने जा रहे है. इस विशाल चट्टान को ’पांडव शिला’ कहते हैं और इसे केवल एक उंगुली से हिलाया जा सकता है.

दरअसल, मान्यता ये है कि यदि कोई सच्चे मन से इस शिला को एक हाथ से हिलाए तो यह हिल जाती है. लेकिन, यदि कोई जोर-आजमाइश करके भले ही दोनों हाथों से पूरा जोर लगाकर हटाने की कोशिश करें तो , शिला टस से मस नहीं होती. इस शिला को हाथ की एक उंगली से हिलते हुए देख कर मन रोमांचित हो जाता है और जो लोग इसे श्रद्धा से हिलाते हैं, उनकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं.

वैसे एक मान्यता ये भी है कि लोग अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए इस पांडव शिला पर छोटे पत्थर फेंकते है.  यदि पत्थर इस भारी भरकम चट्टान पर ही अटक जाए तो पत्थर फेंकने वाले व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण हो जाती है और यदि चट्टान पर न अटके और नीचे गिर जाए तो माना जाता है कि उस व्यक्ति की मनोकामना पूरी नहीं हो पाती.  बता दें, अपने अज्ञात वास के दौरान पांडव यहां पर रुके थे और यहां से जाने से पहले उन्होनें अपनी निशानी के तौर पर इसे यहां रखा था. लेकिन, अब पांडव शिला नामक इस चट्टान को देखने के लिए प्रदेश ही नहीं बल्कि देश-विदेश के लोग भी यहां पहुंचते हैं. वहीं, आस्था का केंद्र बन चुकी पांडव काल की इस शिला को लोग उंगुली से या फिर अपने दोनों हाथों से हिलाते भी है ताकि इसकी सच्चाई को जान सकें.

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